Thursday, November 15News That Matters

ओलांद के बयान पर बोली फ्रांस सरकार- राफेल डील में हमने नहीं चुनी भारतीय कंपनी

राफेल पर छिड़ी सियासी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है. पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान के बाद फ्रांस की वर्तमान सरकार ने कहा कि वह राफेल फाइटर जेट डील के लिए भारतीय औद्योगिक भागीदारों को चुनने में किसी भी तरह से शामिल नहीं थी. सरकार ने जोर देते हुए कहा कि फ्रांसीसी कंपनियों को करार करने के लिए भारतीय कंपनियों का चयन करने की पूरी आजादी है.

फ्रांस सरकार का ये बयान तब आया है जब पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा कि राफेल डील के लिए भारत सरकार की ओर से अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस का नाम प्रस्तावित किया गया था और दसॉ एविएशन कंपनी के पास कोई और विकल्प नहीं था.

ओलांद के इस बयान के बाद देश में राजनीति फिर गर्मा गई है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोलने का एक और कारण मिल गया. राहुल ने ओलांद के इस बयान को दोनों हाथों से लपका और बिना देरी किए पीएम मोदी पर जोरदार हमला बोला.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने बंद दरवाजे के पीछे निजी तौर पर राफेल डील पर बात की और इसमें बदलाव कराया. राहुल गांधी ने कहा कि फ्रांस्वा ओलांद को धन्यवाद, हम अब जानते हैं कि उन्होंने दिवालिया हो चुके अनिल अंबानी के लिए बिलियन डॉलर्स की डील कराई. प्रधानमंत्री ने देश को धोखा दिया है. उन्होंने हमारे सैनिकों की शहादत का अपमान किया है.

कंपनी को पार्टनर चुनने की आजादी

फ्रांस सरकार के बयान में आगे कहा गया कि भारत की अधिग्रहण प्रक्रिया के अनुसार, फ्रांसीसी कंपनियों को भारतीय कंपनियों को साझेदार चुनने की पूरी आजादी है. वे जिसे सबसे प्रासंगिक मानती हैं वे उसको चुन सकती हैं.

फ्रांस सरकार ने कहा कि 36 राफेल विमानों की आपूर्ति के लिए भारत के साथ किए गए अंतर-सरकारी समझौते से विमान की डिलीवरी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के संबंध में पूरी तरह से उसे अपने दायित्वों की चिंता है.

राफेल के निर्माता दसॉ एविएशन कंपनी ने सौदे के ऑफसेट दायित्वों को पूरा करने के लिए रिलायंस डिफेंस को अपने साथी के रूप में चुना था. सरकार इस बात पर कायम है कि दसॉ द्वारा ऑफ़सेट पार्टनर के चयन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी.

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