Monday, February 18

सपा-बसपा ने किया कांग्रेस का प्लान ‘ए’ फेल, प्रियंका लेकर आईं प्लान ‘बी’

प्रियंका गांधी वाड्रा की राजनीति में आने की घोषणा के साथ यह बिलकुल साफ़ है कि आम चुनाव में अब कांग्रेस फ्रंटफुट पर खेलने को पूरी तरह से तैयार है. कांग्रेस इसके लिए काफी दिन से होमवर्क भी कर रही थी. अब आने वाले दिनों में एक-एक कर पार्टी अपने पत्ते खोलेगी. एक पत्ता खुल भी गया है. प्रियंका गांधी के साथ यूपी की सियासत को लेकर कांग्रेस ने जो रणनीतियां तैयार की हैं, आने वाले दिनों में इसकी वजह से विरोधियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. दिक्कत बीजेपी को होगी और सपा बसपा का महागठबंधन भी इससे परेशान हो सकता है.

कांग्रेस के रणनीतिकार यह बात जानते थे कि दिल्ली की सत्ता में वापसी के रास्ते, यूपी से ही होकर गुजरेंगे. और 2019 में नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ विपक्ष के सबसे बड़े नेता के तौर पर राहुल गांधी को खड़ा करने के लिए यूपी में हर हाल में पार्टी मजबूत करना जरूरी है. सूत्रों के मुताबिक पार्टी में प्रियंका के आने की घोषणा कांग्रेस की इसी रणनीति यानी “प्लान बी” का ही हिस्सा है.

“प्लान ए” के तहत कांग्रेस ने ये ट्रंप कार्ड बचाकर रखा था. अगर यूपी में कांग्रेस से सपा और बसपा का गठबंधन होता और पार्टी को सम्मानजनक सीटें मिल जातीं तो शायद प्रियंका को पार्टी में नहीं लाया जाता. हालांकि वो पार्टी के लिए वैसे ही प्रचार करती नजर आतीं जैसे पिछले चुनावों में उन्होंने किया. सपा और बसपा के साथ से कांग्रेस संतोषजनक सीटें जीतने में कामयाब भी हो जाती.

लेकिन…आम चुनाव में सपा बसपा के अलग राह पकड़ने की स्थिति में पार्टी के लिए “प्लान बी” पर अमल करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा. एक बड़ी वजह यह भी कि कांग्रेस के खिलाफ विपक्ष का एक मजबूत मोर्चा शक्ल लेता नजर आ रहा है, जिसके भविष्य में राहुल गांधी के लिए ज्यादा गुंजाइश नजर नहीं आती. पार्टी किसी भी सूरत में ऐसे हालात से नहीं गुजरना चाहेगी. कांग्रेस के दोनों प्लान को लेकर बताने की जरूरत नहीं कि पार्टी पिछले कई महीनों से इन्हें ध्यान में रखकर काम कर रही है.

पुराने जनाधार को वापस पाने की कोशिश

प्लान बी यानी प्रियंका की लॉन्चिंग के तहत कांग्रेस की कोशिश, एक ही वार में सपा बसपा के गठबंधन को जवाब देना, बीजेपी को भारी नुकसान पहुंचाना और अपने पुराने जनाधार को वापस पाना है. दरअसल, कांग्रेस यूपी में दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण मतों की गणित को साधने की फिराक में है. कई कद्दावर नेता पार्टी के लिए ये काम करते नजर आ रहे हैं. ब्राह्मण मतों को साधने के लिए प्रियंका का चेहरा आगे किया जा रहा है. प्रियंका की मौजूदगी से कांग्रेस यूपी की सियासत में हलचल मचाने को तैयार है.

यूपी में ऐसे होगी प्रियंका की महालॉन्चिंग

प्रियंका फिलहाल भारत से बाहर हैं. भारत आने के साथ उन्हें यूपी में शानदार तरीके से लॉन्च करने के लिए कांग्रेस ने रणनीतियां तैयार कर ली है. सूत्रों की मानें तो यूपी कांग्रेस अगले महीने 10 फरवरी को लखनऊ में प्रियंका की मौजूदगी में रमाबाई मैदान में एक बड़ी रैली करने जा रही है. इसे पिछले ढाई दशक में यूपी में कांग्रेस की सबसे बड़ी रैली बनाने की कोशिश हो रही है. पार्टी की योजना उत्तर प्रदेश से करीब 10 लाख लोगों को जुटाने की है. पार्टी पिछले कुछ महीनों से इसके लिए जमीन पर काम भी कर रही है.

इस बारे में यूपी कांग्रेस के युवा नेता शाहनवाज आलम ने आजतक को बताया, “हां, हम लखनऊ में एक बड़ी रैली करने जा रहे हैं. हालांकि अभी इसकी तारीख तय नहीं की गई है. पार्टी के शीर्ष नेता और कार्यकर्ता तैयारियों में व्यस्त हैं.” शाहनवाज ने रैली को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं दी लेकिन यह जरूर कहा, “ये यूपी में धर्म और जाति के नाम पर लोगों को बरगलाने वाली सभी मौक़ापरस्त पार्टियों के लिए एक करारा जवाब होगी. उनके लिए भी जो यूपी में कांग्रेस को कमतर आंक रहे हैं.”

उधर, कांग्रेस के एक दूसरे सूत्र ने रैली की तारीख को कन्फर्म तो नहीं किया, पर यह बताया कि रैली अगले महीने फरवरी के दूसरे हफ्ते तक होगी. इसके जरिए ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम तबके को कांग्रेस के साथ मजबूती से जोड़ना है.

सौ. आज तक

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